माँदर

यहां दि‍न / फूल की तरह खि‍लता है और रात / मांदर की थाप में नाचती है / ................... आओ-आओ बस्‍तर को छुओ / और जिंदा हो जाओ |


बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

अनुनाद: अशोक कुमार पांडेय की नई कविता

अनुनाद: अशोक कुमार पांडेय की नई कविता
Posted by वि‍जय सिंह Vijay Singh पर 7:54 am कोई टिप्पणी नहीं:
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